शिक्षक दिवस पर निबंध हिंदी में 300 शब्द का

हमारा राष्ट्र भारत प्राचिन समय से ही अपने ज्ञान के कारण विश्व का मार्गदर्शन करता आया है। यही से कई महान विद्वानों ने जन्म लिया जिन्होंने शिक्षा जगत को नई पहचान दिलाई, और अपने विशेष ज्ञान से पूरे संसार को अवगत करवाया। ऐसे ही ज्ञानी विद्वानों के लिए हम प्रतिवर्ष शिक्षा दिवस मनाते है। विद्वानों में सर्वपल्ली राधाकृष्णनजी ने अपने ज्ञान से शिक्षा में विशेष योगदान दिया।

डॉ। सर्वपल्ली राधाकृष्णन भाषण शिक्षक दिवस

हम डाॅ . सर्वपल्ली राधाकृष्णन को महान् शिक्षक के रूप में और विशेष रूप में शिक्षा दिवस डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के शिक्षा के लिए दिए विशष योगदान में शिक्षा दिवस मनाते है। डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी की काबिलियत के कारण उन्हें 1952 में भारत के पहले उपराष्ट्रपति का पद पर कार्य किया। उसके बाद 1962 में राष्ट्रपति पद सृजित किया। इसी प्रतिभा के कारण उनके शिष्य और आम-जन ने उनका जन्मदिन को शिक्षक दिवस के रूप मनाना प्रारम्भ हुआ।

जब उनको ये बताया गया कि आपके जन्मदिन को पूरे भारत वर्ष में शिक्षक दिवश के रूप में मनाना चाहते है, तो डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने कहा की शिक्षक बना ये मेरा सौभाग्य था और अब मेरे जन्मदिन को शिक्षक रूप में मनाया जाएगा। ये मेरे लिए गौरव की बात है। उसी तारीख से हर 5 सितम्बर अब शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्ण का एक बहुत रोचक किस्सा- जब एक बार वे किसी समारोह में गए, तो वहाॅ एक अंग्रेज ने दूसरों को बातों-बातों में कहा की भगवान हमसे बहुत ज्यादा प्यार करता है, यही कारण है कि उन्होंने हमें सबसे गोरा बनया। ये बात डाॅ सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को खटकी उन्होंने सभा के अन्त में कहाॅं की मित्रों में आप को एक बात बतना चाहता हॅ। जो यहाॅं मेरे एक मित्र ने कहाॅं की भगवान केवल गोरे लोगों ज्यादा प्यार करता है।

इस पर में आप को एक कहानी सुनाना चाहता हॅ। बात तब कि है जब भगवान इंसानों को बना रहा था, तब उसने एक इंसान बनाया जो बहुत ज्यादा काला बना, दूसरी बार फिर बनया वह थोड़ा कम पका और गोरा इंसान बना, तीसरी बार फिर बनया और वो बराबर बना न तो ज़्यादा गोरा था और ना ही ज़्यादा काला था, और वो अंतिम परिणाम हम है।

उनकी बात से अंगेजों की गदन झुक गई, और डाॅं सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी ने कहा दोस्तों आप रंग और बनावट के आधार पर ये नहीं कह सकते कि भगवान हमें ज़्यादा प्यार करता है। भगवान तो केवल उसी से प्यार करता है, जो इंसान ईमानदारी से कार्य करता है, और दूसरों को कृष्ट नहीं देता।