रेडियो पर निबंध – Radio Essay in Hindi

छोटे से निर्जीव यन्त्र ,किन्तु वातावरण को सजीव बना देनेवाले,जादू के पिटारे का नाम है,रेडियो।नगर नगर,ग्राम-ग्राम का श्रृंगार करने वाली इस सुलभ वस्तु की जितनी भी प्रशंसा की जाय,कम है।

पदार्थ का विनाश नही होता-विज्ञान के इसी मूलमंत्र पर रेडियो का अविष्कार हुआ।हम जो कुछ बोलते है ,वह ध्वनिन्त्रण बनकर वायुमंडल में वयाप्त हो जाता है।रेडियो इन्ही ध्वनियों को पकड़कर हमारे समक्ष उपस्थित करता है।तूफान में तार टूट जाने के कारण तार  से समाचार भेजने में काफी कठनाई होती है।अतः बिना तार के भी तार भेजा जा सके ,इसके लिए यत्न प्रारंभ हुआ।इस  क्षेत्र में हमारे वैज्ञानिक श्री जगदीशचंद्र बसु ने अनेक परीक्षण किये,किन्तु सफलता का सेहरा इटली के वैज्ञानिक मार्कोनी के सर बंधा।

रेडियो ने संसार को एक सूत्र में बांध दिया है। यह’वसुधैव कुटुंबकम’ का सही अर्थ में उदघोषक है।आज पृथ्वी की कक्षा में उपग्रह इंसेट -1 बी के स्थिर होने का समाचार सुनकर हम प्रफुल्लित हो उठते ही।हमारी वैज्ञानिक संभावनाओं के अंधेरे कोनो में एक ज्योति चमक उठती है।

पाकिस्तान में जन आंदोलन के विरुद्ध फौजी शासन की दमनात्मक कार्रवाइयों की जानकारी पाकर खून खौल उठता है ,तो दूसरे ही क्षण श्रीमती महादेवी वर्मा को ज्ञानपीठ पुरस्कार मिलने की खबर से मन मे जैसे वसन्त की हरियाली मिल जाती है।ज्योही हम सुनते ही कि भारतीय क्रिकेट दल ने लंदन में विश्वकप जीत लिया है,हम खुशियो के मारे नाचने लग जाते है।संसार के सुदूर कोने में कोई मामूली सी बात घटती है तो रेडियो द्वारा उसकी जानकारी पाते है, प्रभावित होते है।

रेडियो से केवल हम रंग बिरंगे समाचार ही नही सुनते ,मनचाहे संगीत का आनन्द भी लेते है।शास्त्रीय संगीत हो या सुगम संगीत , लोकगीत हो या चलचित्र संगीत ,रेडियो का डायल का घुमाए और सब क्षण  भर में हाजिर ।रेडियो ने ग्रामोफ़ोन की उपयोगिता कम कर दी है।नाटक के लिए अब अधिक दौड़ने की जरूरत नही है ,सिनेमा घर मे टिकट के लिए टिकट खिड़की की भीड़ में कमीज फाड़ने की आवश्यकता नही,बस पर बैठ नाटक सुन सकते है,सिनेमा के साउंड ट्रैक सुन सकते है।

यदि आप शिक्षा प्राप्त करना चाहे तो रेडियो के द्वारा यह भी संभव है। काव्य ,इतिहास ,राजनीतिक ,दर्शन ,विज्ञान – शायद हि कोई विषय हो जिस पर रेडियो में भाषण ,परिसंवाद गौष्ठियों का आयोजन न होता हो ।स्कूल विद्यार्थियों के लिए तथा विश्वविद्यालय छात्रों के लिए इसमें अलग अलग कार्यक्रम रहते है।बच्चे यदि ‘बाल मंडली’ और घरौंदे से मन बहलाते है ,नारियाँ यदि नारी जगत और आंगन से खुश होती है ,किसान यदि चौपाल से सूचनाए प्राप्त करते है , तो साहित्यक पराग से आनंदविह्वल होते है।इस तरह ,रेडियो से भिन्न भिन्न वय और रुची के अनुसार कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते है।

विजयन के बारे में कहा जात है जिसने मानवता के संसार के अधिक साधन प्रस्तुत किये है , किन्तु इसने ऐसे भी कुछ पदार्थ आविष्कृत किये है , जो अत्यंत उपयोगी तथा आपतिरहित है।उनमें रेडियो का नाम सर्वप्रथम लिया जाता है।

रेडियो विज्ञान के अभिशाप नही ,वरदान है।यह संसार मे शवता नही शिवता का सूत्रधार है।यह मानवता का संहारक नही,श्रृंगारकर्ता है।यह मानव मष्तिष्क का तामस नही ,सात्विक चमतकार है।

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