बसन्त अथवा ऋतुराज – Essay On Basant Ritu In Hindi

बसन्त अथवा ऋतुराज पर निबंध

बसन्त का श्रृंगार – बसन्त आ गया, चारों ओर प्रकृति के सौंदर्य की चर्चा होने लगी। इस के श्रृंगार को देखकर कौन स प्राणी मोहित हुए बिना रह सकता है।

प्रकृति का नवीन रूप  जिस प्रकार मनुष्य पुराने वस्त्र उतार कर नए धारण करता है, ठीक उसी प्रकार इस ऋतु में प्रकृति भी नया चोला धारण करती है। प्रकृति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो वह अभी-अभी सौंदर्य के सरोवर में स्नान करके निकली हो। प्रकृति के अनुपम सौंदर्य को देखकर क्या मनुष्य, क्या पक्षी, सभी जीवधारी आनंद से झूम उठते हैं।

बसन्त अथवा ऋतुराज पर निबंध – 1 (500 शब्द)

मनाने की विधी – भारत की छह मुख्य ऋतुएं ग्रीष्म, वर्षा, शरद, शिशिर, हेमंत और बसन्त हैं। इनमें से बसंत को ‘ऋतुराज’ माना जाता है। यह हर्ष से भरपूर पर्व प्रतिवर्ष भारत में माघ सुदी पंचमी के दिन मनाया जाता है। इस अवसर पर बच्चे से लेकर बूढ़े तक हर मानव पर एक नया रूप छा जाता है। प्रकृति की सुंदर छवि देखकर सब विभोर हो उठते हैं। सारे घरों के लोग पीले रंग के वस्त्र धारण करके प्राकृतिक सौंदर्य से मेल रखने की चेष्टा करते हैं। इस दिन युवतियां पीली साड़ी में लता के समान झूम उठती हैं।

प्राकृतिक सौंदर्य – बसन्त की प्रत्येक वस्तु पर अमिट छाप दिखाई देती है। वृक्षों पर पीले पत्तों के स्थान पर नवीन पत्ते निकलते हैं। लहराते खेतों में खिले सरसों के फूल अत्यंत सुहावने प्रतीत होते हैं। जिस प्रकार वर्षा ऋतु में सब कुछ हरा-भरा दिखाई देता है, उसी तरह बसंत में बसंती रंग अपना प्रभुत्व जमा लेता है। बसंत ऋतु न केवल समूची धरती को अपने रंग में रंग लेती है, बल्की मनुष्य भी इससे वंचित नहीं रहते हैं। वे भी इन दिनों पीले वस्त्र पहनने में आनंद मानते हैं।

बसन्त उत्सव – बसन्त ऋतु के आगमन पर मानो उसका स्वागत करने के लिए लोग उत्सव मनाते हैं। इस का नाम ही बसन्त पंचमी है। यह उत्सव जहांबसन्त ऋतु के आगमन पर उसका स्वागत करता है, वहां यह देश-रक्षा और धर्म-रक्षा की प्रेरणा भी देता है। चमकौर साहब के युद्ध में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के बच्चों की शहीदी, हकीकत राय की धर्म के खातिर बलिदान की स्मृति दिला कर यह उत्सव सभी के अंदर देश और धर्म के खातिर मर मिटने के लिए जोश उत्पन्न करता है।

उल्लास उत्पादक – बसन्त के आने से प्रकृती के साथ-साथ, मनुष्य के जीवन में भी उल्लास भर जाता है। मंद-मंद पवन के मस्त झोंके जब जब अठखेलियां करते हैं, तो नई उमंगों का संचार होने लगता है। इस सुहावने समय में पग-पग पर मन को लुभाने वाली सामग्री विद्यमान हो जाती है। प्रकृति की गोद में खेलने की प्रबल इच्छा सभी के ह्रदय में जाग उठती है। प्राय: इन दिनों लोग खुले मैदानों में निकल जाते हैं और अपने इष्ट-मित्रों के साथ प्राकृति की शोभा से आनंदित होते हैं। यही इस ऋतु की सबसे बड़ी विशेषता है।

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