२६ जनवरी का भाषण हिंदी में

गुलामी की दास्ता के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया था। तथा देश पूर्ण रूप से स्वतन्त्र हुआ। दोस्तों इसी कारण हम 26 जनवरी को आजादी दिवस के रूप में हर्षोउल्लास के साथ मनाते है। इतिहास पर नज़र डाले तो हमें पता चलेगा, कि पहले हमारा देश भारत सोने की चिडि़या और एक महान वह गौरवशाली राष्ट्र था। इसी कारण बाहरी देश यहॉ पर धनार्जन और व्यापार की नीति से यहॉ आए लेकिन यहॉ की जनता काफी भोली-भाली थी।

जो आसानी से दूसरे देशों को यहॉ पर व्यापार करने की इज़ाज्त दे दी, लेकिन जब बाहरी देशों में अॅंग्रेजों ने यहॉ व्यापार और यहॉ की सम्पन्नता को देखने आए तो उन्हें भारत की भोली-भाली जनता द्वारा किया गया आदर वह प्रेम पसन्द आया। क्योंकि हमारे देश की परम्परा रही है अथिति देवों भव: यानी मेहमान, पर्यटक भगवान के समान है। लेकिन अॅंग्रेजों ने अपने निजी लाभ के लिए इस देश की जनता पर अत्याचार करना प्रारम्भ कर दिया और यहॉ का सोना, हीरे, जवारात, किमती सामान सब कुछ पर अपना अधिकार करना चाहा।

गणतंत्र दिवस का भाषण

जब अॅंग्रेजों ने यहॉ की धरोवर को अपने कब्ज़े में कर दिया। तो उनके पास इस देश में अब लेने ने लिए और कुछ नहीं बचा लेकिन हमारे देश के नागरिकों में कई प्रकार के अनोखें गुण विद्यमान थे, उन्होंने यहॉ की जनता से गुलामों की तरह काम करवारा।

लेकिन हमारा भारत प्राचीन काल से वीरता और वीरों का देश रहा हैं। भारत में अॅंग्रेजों का अत्याचार बढ़ चुका था। और यहॉ लोगों से पशुओं के समान काम में लिया जाने लगा। इस सभी के कारण यहॉं के देशभक्तों में आक्राेश जगा और इन्होंने देश की आजादी के लिए अॅंग्रेजों से लोहा लेने का निश्चय किया और पहले तो अॅंग्रेजों को समझाया लेकिन जब वे अपनी हरकतों से बाज़ नहीं आए, तो हमारे वीर-जवानों और क्रांतिकारी नेताओं ने उनका विरोध किया। ये विरोध युद्ध में बदल गया।

उस समय हमारे जवानों के पास हथियारों की कमी थी। फिर भी उन्होंने संकल्प कर दिया था कि देश के लिए मर-मिटेंगे और अॅंग्रेजी सेना से सामना किया। देश में आजादी की ज्वाला मंगल पांडे ने 1857 में कोलकता के पास बैरकपुर में प्रारम्भ की परन्तु उस समय संचार साधनों की अत्यंत कमी होने के कारण ये ज्वाला आग नहीं बनी। इंदिरागॉधी, लक्ष्मीबाई, मंगल पांडे, नाना साहेब, सरदार पटेल, सुभाष चन्द्र बोस, लाला लाजापत राय, बाल गंगाधर तिलक, विपिन्द्र चन्द्र पाल, गोपाल, महात्मा गॉधी, नेहरू आदि ने मिलकर एक साथ अॅंग्रेजों का विरोध किया क्योंकि ये आग इस सब के दिलों में जल रही थी।

13 अपैल 1919 को जलिया वाला बाग घटना, ये भारतीय इतिहास के लिए सबसे दुखदायी घटना थी। इस घटना में अॅंग्रेजों के जनरल डायर ने अंधाधुन गोलियां चलाने का निर्देश सेना को दे दिया इसका परिणाम यह हुआ कि वहा मौजूद महिलाओं, बच्चों, बूढ़ाें तथा असंख्य लोगों का बेरहमी से मार दिया और लोगों को घायल कर दिया। इस घटना से उधम सिंह, भगत सिंह और कई क्रांतिकारियों को जन्म दिया। और भारत के तमात युवा भारतमाता के चरणों में शहीद होने के लिए तैयार थें!

दोस्तों हमारी आजादी जिस में हम आज जीवन-यापन कर रहे हैं। ये हमारे देश के लिए एक बहुत गौरव का दिन है। गुलामी की जंजीरों को काटने के लिए कई वीर शहीद हुए कई मॉ अपने पूत्रों की कुर्बानी दी तब जाकर ये देश स्वतन्त्र हुआ। इसी कारण 26 जनवरी को हमारे देश के कोने-कोने में बड़े हर्षोल्लास वह उत्साह के साथ मनाया जाता है। तथा स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, सर 26 january कारी संस्थानों आदि पर इस दिन तिरंगा फहराया जाता है। और शहीदों को नमन किया जाता है। लहराता हुआ तिरंगा हर भारतीय के रोम-रोम तथा दिल में भारत माता के लिए जोश का संचार करता है।